संवादसहयोगी,गोपेश्वर:पौराणिकजागरविधाकेसंरक्षणऔरक्षेत्रकीखुशहालीकेलिएचमोलीजिलेकीउर्गमघाटीकेबुजुर्गोंनेलगातार36घंटोंतकमांनंदावदेवीस्वनुलकेजागरोंकोगायनकिया।जागरगीतदेवताओंकोजागृतकरनेकेलिएगाएजातेहैं।यहपरंपरादेवीनंदाकामायकाकहेजानेचमोलीजिलेकेलगभगहरगांवमेंनिभाईजातीरहीहै।लेकिन,समयकेसाथलोगइससेविमुखहोतेजारहेहैं।

चमोलीजिलेमेंहोनेवालेधार्मिकअनुष्ठानोंमेंजागरविधाकाविशेषमहत्वहै।खासकरमांनंदाकेजागरतोयहांहरगांवकीपहचानहैं।इसलिएइसेनंदा(देवीपार्वतीकास्थानीयरूप)कामायकाकहागयाहै।लोगजागरोंकेमाध्यमसेहरसालमांनंदाकोकैलाससेअपनेमायकेमेंबुलातेहैं।जबउन्हेंकैलासकेविदाकियाजाताहै,तबभीगांव-गांवजागरोंकागायनहोताहै।हालांकि,आधुनिकताकीदौड़मेंग्रामीणधीरे-धीरेइसविधासेकिनाराकरतेजारहेहैं।नतीजा,जागरी(जागरगानेवाले)भीअबसीमितसंख्यामेंरहगएहैं।वहभीदूर-दराजकेगांवोंमें।

ऐसेदौरमेंउर्गमघाटीकेबुजुर्गोंनेउर्गमगांवमेंलगातार36घंटेमांनंदाकेजागरगाकरअनूठाउदाहरणपेशकिया।जागरगायनकरनेवालेबुजुर्गोंमेंल्यारीनंदास्वनूलदेवीमणोमेलासमितिउर्गमघाटीकेशिवसिंहकाला,शिवसिंहचौहान,कुंदनसिंहरावत,मोहनसिंहनेगी,कुंवरसिंहनेगीवबलवंतसिंहरावतशामिलथे।इसकार्यक्रममेंमहिला,पुरुष,बुजुर्गवबच्चोंसमेतसौसेअधिकग्रामीणोंनेभागलिया।

संस्कृतिप्रेमीउर्गमनिवासीरघुवीरसिंहनेगीकहतेहैंकिआजजागरगायनकीपरंपराविलुप्तिकेकगारपरहै।ऐसेमेंग्रामीणबुजुर्गोंकायहप्रयासनईपीढ़ीकोप्रेरणादेनेवालाहै।नेगीकेअनुसारयहविरासतहमेंअपनेबुजुर्गोसेमिलीहै,जिसेभविष्यकीपीढ़ीकोसौंपनाहमसबकीजिम्मेदारीहै।ताकियहलोकविधारोजगारकाभीजरियाबनसके।

By Duncan